गुस्सा करना छोड़ दो वरना सिर्फ पछताओगे


ग़ुस्सा सबको आता है नहीं आता हैं तो उसको काबू करना। बस यही बात  गुस्से को बुरा बना देती है । जरासल गुस्सा आना बुरी बात नहीं है  लेकिन गुस्से को हम ठीक से कंट्रोल नहीं कर पाते तो ओ बुरा बन जाता है।

 

क्या हो अगर आपको एक आइसी कार दी जाय जिसमे सीर्फ एक्सलेटर ही हो जिसमे आपके पास कोई ब्रेक नहीं है,या कोई स्टेअरिंग भी नहीं है।  आप उस कार को कभी चलाओगे ही नहीं क्यूंकी आप आगे बढ़ने के लीय एक्सलेटर तो दबाओगे लेकिन उसे सटेरींग न होने की वजहसे सही दिशा मे नहीं ले जा पाओगे जरूरत पड़ने पर रोक नहीं पाओगे ओर ज्यादा चानसेस है की ईस तरह की कार चलाने से आपका जान ओर माल का नुकसान हो जाय।  

गुस्सा कुछ ईस तरह का ही हैं जो सीर्फ ओर सीर्फ नुकसान ही पोहनचा सकता है।  याद करो की आज तक आपने गुस्से मे आकार कीतनी चीजे तोड़ी है कितने मोबाइल फोड़े है कीतनोके दिल तोड़े है। क्या ओ करना जरूरी था आज सोचोगे तो आपका जवाब होगा नहीं।  अगर आप उस वक्त गुस्से को कंट्रोल कार पाते तो आप उस आर्थिक और पारिवारिक नुकसान से बच जाते।

आपको कहानी सुनाता हु एक घुसेल साप की जिसको बहुत जलद ओर बहुत जादा गुस्सा आता था एक दिन ये साप कही घूमने निकल पड़ा जमीन पर रेंगते रेंगते ओ आगे बढ़ रहा था कुछ दूरी पार करने के बाद रास्ते मे छुरी गिरी थी उसने उस छुरी को देखा ही नहीं । जैसे ही साप उसके ऊपर से गुजरा उसको एक छोटासा कट लग गया उसे दर्द होने लगा, तुरन्त उसे ग़ुस्सा भी आ गया गुस्से मे साप ने छुरी को मु से काटने की कोशिस की लेकिन उल्टा साप का जबड़ा जखमी हो गया अब भी उसके पास मोका था की ओ छुरी को छोड़के आगे निकल ले, लेकिन नहीं छुरी पर उसका गुस्सा बरसने लगा साप को किसी तरह उस छुरी को बर्बाद करना था।  गुस्से मे उसने छुरी को लपेटना शुरू किया ओर देखते ही देखते छुरी को तो कुछ हुआ नहीं लेकिन साप के टुकड़े टुकड़े हो गए।  गुस्सा कुछ ऐसा ही है सामने वाले को नुकसान पोहनचने से जादा ओ हमे बर्बाद कर देता है।

 गुस्से मे दिमाग सही निर्णय नहीं ले पाता है।  हम गुस्से मे आकार जो भी करते है उसका बादमे सिर्फ पछतावा ही होता है।  हम नहीं चाहते की कोई हमारा आपमान करे कोई हमारे बीलीव्स को तोड़ने की कोशीस करे अगर कोई ऐसा करता है तो हमे गुस्सा आता है।  जो की जायज हो सकता है लेकिन जरूरी नहीं। मैं फिरसे दोहराना चाहूँगा गुस्सा आना जायज हो सकता है लेकिन जरूरी नहीं।

आज के बाद जबभी आपको गुस्सा आए तो याद करना उस साप को जीसने गुस्से मे छुरी को लपेटकर खुद को बर्बाद कर लिया था।  जब भी गुस्सा आये तो सोचना की आज गुस्से मे जो भी मै करूंगा उससे सिर्फ मुजे नुकसान ही होगा। जिस दिन आप गुस्से पर काबू पा लोगे उस दिन दुनिया आपके काबू  मे होगी।

  


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